Rona Shayari

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जब छोड़कर जाना ही था तो जिंदगी में आये क्यों, हमें एक पल के लिए मुस्कुराकर जिंदगी भर के लिए आंसू देकर गए क्यों।

जब से तेरा साथ छूटा हैं तब से खुशियों का आना मेरी जिंदगी में बहुत मुश्किल हो गया हैं।

उसकी यादो में हर दिन तड़पते रहते है, ना चाहकर भी इन आंसुओं को बहाते रहते है।

जब किसी अपने का साथ छूटता हैं तब सच में ये दिल बार-बार रोने को कहता है।

खुदा से भी ज्यादा मानते थे उसे हम, लेकिन क्या पता था एक दिन कुछ इस तरह अलग हो जायेंगे हम।

जिंदगी में दर्द इतने हैं की किसी को बता भी नहीं सकते हैं, इन दर्दो से थोड़ा निजात पाने के लिए हम थोड़ा रो लिया करते हैं।

खुशियों ने मेरी जिंदगी से कुछ इस कदर मुँह मोड़ लिया है की अब बस जिंदगी में गम का ही बसेरा रह गया हैं।

हर रात बस उनकी ही यादो में रोते रहते है, अपने इस दिल को तकलीफ देते रहते हैं।

रोने में भी अलग ही सुकून आता है जब रोने के लिए कोई अपना कन्धा देने वाला हो।

दिन रात बस उनकी यादो में ही खोये रहते है, जब मौका मिल जाता हैं तब अपने आंखों से आंसुओं को बहा लिया करते हैं।

जिनका कोई अपना नहीं होता हैं अक्सर वो लोग रात की तन्हाइयों में रोया ही करते है।

जो इंसान आपके हर दर्द को समझता हैं वो आपके आँसू आने पर खुद भी रो पड़ता है।

जब से तेरा साथ छूटा हैं सच में तब से यह दिल हर वक़्त रोया है।

महोब्बत ख़ुशी दे ना दे लेकिन एक ना एक दिन गम जरूर देकर जाती है।

जब इंसान बेहद अकेला पढ़ जाता है तब अक्सर वह रोया ही करता हैं।

सूख गई जो डाली उसपर फूल नहीं खिलते, इस दुनिया की रीत यही है जिसे चाहो वहीं नहीं मिलते।

आँसू भी मेरी आँख के अब खुश्क हो गए, तू ने मेरे खुलूस की कीमत भी छीन ली।

हमें आँसुओं से ज़ख्मों को धोना नहीं आता, मिलती है ख़ुशी तो उसे खोना नहीं आता, सह लेते हैं हर ग़म को जब हँसकर हम, तो लोग कहते है कि हमें रोना नहीं आता।

वो अश्क़ बन के मेरी चश्म-ए-तर में रहता है, अजीब शख़्स है पानी के घर में रहता है।

इनको न कभी आँख से गिरने देता हूँ, उनको लगते हैं मेरी आँख में प्यारे आँसू।

मेरे आँखों का आंसू तुम्हे पानी सा क्यों लगता है, टूट कर मेरा चाहना तुम्हे नादानी सा क्यों लगता है।

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जो तुमसे मोहब्बत करें उसे कभी रोने मत देना, लड़ाई-झगड़े कितने भी हो उसे खोने मत देना

मुझको रुला कर दिल उसका रोया तो होगा, उसकी आँखों में भी आँसू आया तो होगा, अगर न किया कुछ भी हासिल हमने प्यार में, कुछ न कुछ उसने भी खोया तो होगा।

उसकी आखों में आँसू और पैरों में छालें हैं, इस दुनिया में कितने लोग उसूलों पर चलने वाले हैं।

अभी से क्यों छलक आये तुम्हारी आँख में आँसू, अभी छेड़ी कहाँ है दास्तान-ए-ज़िन्दगी मैंने।

सदियों बाद उस अजनबी से मुलाकात हुई, आँखों ही आँखों में चाहत की हर बात हुई, जाते हुए उसने देखा मुझे चाहत भरी निगाहों से, मेरी भी आँखों से आँसुओं की बरसात हुई।

वो इस तरह मुस्कुरा रहे थे, जैसे कोई गम छुपा रहे थे, बारिश में भीग के आये थे मिलने, शायद वो आँसू छुपा रहे थे।

अश्क़ से आज आँखों में क्यों हैं आये हुए, गुजर गया है ज़माना तुझे भुलाये हुए।

वापसी का सफर अब मुमकिन न होगा। हम तो निकल चुके हैं आँख से आँसू की तरह।

दो चार आँसू ही आते हैं पलकों के किनारे पे, वर्ना आँखों का समंदर गहरा बहुत है।

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