79+ Alone Shayari – (अकेलेपन पर शायरी)

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1- कल भीड़ थी पास आज कोई भी नहीं, कल सब थे साथ आज कोई भी नहीं, पहले हर बात पर वाह वाही करते थे जो आज मेरी सुनने वाला आवाज कोई भी नहीं।

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2- शामें भी अकेली बीतती है और सवेरे भी, पर क्या फ़र्क़ पड़ता है, आएं भी अकेले थे जाएंगे भी अकेले ही।

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3- मतलब के यारों की भीड़ से अकेलापन अच्छा है, झूठी मोहोब्बत से बेहतर ये अकेलापन अच्छा है।

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4- होठों ने हर बात सभी से छुपा कर रखी, कम्ब्बख्त आँखों को ये हुनर कभी आया ही नहीं।

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5- महफ़िल वो दुकानें है साहब जहाँ झूठा जूनून मिलता है, कभी आना अकेलेपन के बंद कमरों में सच यही सुकून मिलता है।

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6- सिर्फ दर्द ही मिला मुझे तेरे रहने से, सुकून मिलता है मुझे अब अकेले रहने से।

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7- वो अपने मुझे दिलासा देंगे मुझे भरम था, वो टूट गया रिश्ता और भरम भी जब देखा उनके हाथों में मरहम नहीं नमक था।

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8- समझाने वाले बहुत है समझने वाला कोई भी नहीं, राह बताने वाले बहुत है पर साथ चलने वाला कोई भी नहीं।

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9- जब अच्छा वक़्त था हर कोई नज़दीकी दिखाई पड़ता था, जब से बुरा वक़्त पास आया है दूर-दूर तक कोई अपना नज़र नहीं आता मुझे।

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10- हज़ारों ऐनक इतना कुछ नहीं दिखा पाई जो अकेलेपन ने दिखा दिया मुझे, हज़ारों किताबें इतना कुछ न सीखा पाई जितना अकेलेपन ने सीखा दिया मुझे।

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11- आरज़ू अकेलेपन के मिटने की कब से कर रहा हूँ, सिर्फ आँखें खुली हुई है अंदर से तो मैं कब का मर रहा हूँ।

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12- महफ़िलें खामखा के झमेले है साहब, इन दिखावे के साथियों से बेहतर हम अकेले है साहब।

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13- इंसान भी गिरगिट से कम कहाँ है, फ़र्क़ सिर्फ इतना है वो रंग बदलते है और ये मिज़ाज।

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14- मेरे नज़दीक आने की सभी को मना ही है, मेरे नज़दीक अब बस मेरी तन्हाई ही है।

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15- इस दुनिया का टूटना पहले से ही तय है जनाब क्यूंकि ये दुनिया भरोसे पर कायम है।

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16- मेरे दिल को तोड़ उसने गुन्हा किया फिर इश्क़ के अदालत में उसे गलती बता कर बाइज़्ज़त बरी भी हो गया।

17- सच्चे दिल से मोहोब्बत भी हमने की और दगा भी हमे ही मिली, दिल तोड़ने का गुन्हा उन्होंने किया पर सजा भी हमे ही मिली।

18- दोगली बातें अब जुबां पर होती है, कभी कोसता हूँ उसे तो कभी खोजता हूँ उसे।

19- जाना चाहता हूँ ऐसे जहान में जहां एक खुदा तू जाना पहचाना रहे बाकी सब अनजान हो।

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20- जब तक तुझसे मोहोब्बत थी अकेले नहीं रहा जाता था, जब से अकेलेपन से मोहोब्बत हो गई अब किसी के साथ नहीं रहा जाता।

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21- तकलीफ तो होगी तुझे अनजान कर देने में पर अपना कर ही तुझे, हमे कोई ख़ास सुकून नहीं मिला।

22- अब ये दिल दर्द बाटने को दौड़ता है, क्यूंकि अकेलापन इस दिल के पीछे अब काटने को दौड़ता है।

23- अकेले ही रो लेते हैं अकेले ही पोंछ लेते हैं इन आंसुओं को, अकेलेपन की संगत में देख हमने क्या-क्या सीख लिया है।

24- खुद की कह कर खुद ही सुन लेते हैं, अब ना कोई सुनाने वाला है और ना कोई दल दुखने वाला है।

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25- मेरा और उस चाँद का मुकद्दर एक जैसा है, वो तारों में तन्हा है और मैं हजारों में तन्हा है।

26- हर दिल टूटे आशिके की गवाही है, मोहोब्बत के ज़ख्मों की तन्हाई ही दवाई है।

27- बातें बताने को बहुत सी रह गई कहने को पर सुनने वाला अब कोई ना रहा।

28- साथी के संग थे तो धीरे चल रहे थे, जब से अकेलेपन का हाथ थामा है सबसे आगे निकल गए हैं।

29- मोहोब्बत में तेरी यूँ फ़ना हो गए हैं, की हज़ारों के संग उठना-बैठना होने के बावजूद भी तनहा हो गए हैं।

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30- तन्हाई कोई लफ्ज़ नहीं सजा है किसी को पाने की किसी का साथ चाहने की सजा।

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31- वो छोड़ कर भी तो हमे वहां गए जहा मिल कर हमे सारे जहान से लड़ना था।

32- अकेले चार दीवारों के बीच बड़बड़ाता रहता हूँ, मैंने सुना है दीवारों के भी कान होते है।

33- सब छोड़ते ही जा रहे हैं मुझे ऐ ज़िन्दगी, जा तुझे भी इजाजत है मुझे अकेला कर दे।

34- अकेलापन वो सजा है हुज़ूर जो की उसे मिलती है जो बेक़सूर होता है।

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35- दोस्त मुश्किलों में साथ भले छोड़ जाएं लेकिन ये अकेलापन आसानी से साथ नहीं छोड़ता।

36- ये social media की दुनिया है साहब यहाँ सिर्फ जान्ने वाले होते हैं दोस्त कोई नहीं होता।

37- मेरी पलकों का अब नींद से कोई ताल्लुक नही रहा, मेरा कौन है ये सोचने में रात गुज़र जाती है।

38- भीड़ में भी किसी से बात नहीं करता मैं, जानता हूँ कोई सुनेगा नहीं सब बस सुनाएंगे मुझे।

39- ना रास्तों ने साथ दिया ना मंज़िलों ने इंतज़ार किया, मैं क्या लिखूं ज़िन्दगी पर मेरे साथ तो उम्मीदों ने भी मज़ाक किया।

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40- खुद के चोट लगी हो फिर भी फ़िक्र में तुम ही हो, कहने को बातें कई है पर फिर भी ज़िक्र में तुम्ही हो।

41- सच्चे हैं इसलिए अकेले रह गए, झूठे होते तो हमारे भी कई चाहने वाले होते।

42- तेरे बाद इसी अकेलेपन से दिल लगा बैठे हैं हम, यकीन है ये तेरी तरह मेरा साथ नहीं छोड़ेगा।

43- महफिलों पर से भरोसा उठ चूका है हमारा, अब हमे यकीन बस अकेलेपन पर है।

44- अलग ही मज़ा है अकेले जीने में, ना किसी के चले जाने का गम ना किसी के रूठ जाने का गम है सीने में।

45- अजीब है मेरा अकेलापन ना खुश हूँ ना उदास हूँ, बस अकेला हूँ और खामोश हूँ।

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46- जब सभी को खुश करना चाहो तो सब नाराज़ भी जल्दी हो जाते हैं, सभी को अपनाने के चक्कर में अपने कहीं खो जाते हैं।

47- अकेले में ही रोते हैं अकेले में ही मुस्कुराते है, ऐ-अकेलेपन अब हम बस तुझे चाहते हैं।

48- मैं तनहा हूँ मुझे तनहा ही रहने दो, बहुत डर लगता है साथ देकर छोड़ने वालों से।

49- तू भूल गया होगा मुझे बस यही सोच-सोच कर तू मुझे याद आता रहता है।

50- अपनी चाहत के संग घर बसाने वालों की क़िस्मत में तबाही ही लिखी होती है, सभी को साथ ले कर चलने वालों की क़िस्मत में तन्हाई ही लिखी होती है ।

51- अक्सर अकेलापन से उसी की मुलाक़ात होती है, जिसकी ना क़िस्मत और ना ही चाहत उसके साथ होती है।

52- मेरे अकेलेपन का मज़ाक बनाने वालों ज़रा ये तो बताओं जिस भीड़ में तुम हो उनमे तुम्हारा कौन है।

53- ख़्वाब बोए थे और अकेलापन काटा है, इस मोहोब्बत में ज़िन्दगी का बहुत घाटा है।

54- तू दूर क्या गई अकेलापन नज़दीक आ गया, पहले तकलीफ हो रही थी अब सोचता हूँ ये दिन भी ठीक आ गया।

55- लूट लेते हैं अपने ही वरना गैरों को क्या खबर इस दिल की दीवार कहाँ से कमज़ोर है।

56- गिर जाओ तो कोई उठाने नहीं आता, मजबूरी देख कर सब फायदा उठाने आ जाते हैं।

57- दिल देने आए थे दिलासा दे कर चले गए, वो वफ़ा करने आए और खफा कर के चले गए।

58- मुझे ढूंढ लेती है रोज़ एक नए बहाने से तेरी याद वाकिफ हो गई है मेरे हर एक ठिकाने से।

59- क़रीबी बहुत है पर क़रीब कोई नहीं, मेरे नसीब सा बदनसीब कोई नहीं।

60- तन्हाई नहीं ये तबाही है, जिसकी आदत इस दिल ने लगाई है।

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61- जब पहुंचा अकेलेपन के जहां में तो पाया की मेरे जैसे कई है यहाँ पे।

62- अंदाज़े से नहीं तजुर्बे से कह सकता हूँ, मोहोब्बत से ज्यादा अकेलापन बेहतर है।

63- कभी सोचा ना था तन्हाइयों का कुछ यूँ आलम होगा, की अब किसी के आने से ना ख़ुशी होगी और ना किसी के जाने का गम होगा।

64- तेरे इश्क़ में तबाह होने से बेहतर तनहा हो जाऊं मैं, अगर तेरी चाहत के लिए ही भटकना है ज़िन्दगी भर तो इस से बेहतर है तबाह हो जाऊं मैं।

65- मुझे ढूंढ लेती है रोज़ एक नए बहाने से तेरी याद वाकिफ हो गई है मेरे हर एक ठिकाने से।

66- अब जो मेरे नहीं हो सके हो तो कुछ ऐसा कर दो, मैं जैसा पहले था मुझे वैसा कर दो।

67- वो हर बार मुझे छोड़ के चले जाते हैं तन्हा, मैं मज़बूत बहुत हूँ लेकिन कोई पत्थर तो नहीं हूँ।

68- अकेले साथ जाग कर सोचते है क्या हासिल हुआ हमे तेरी मोहोब्बत के पीछे भाग कर।

69- ना जाने किस मनहूस घड़ी में तुझे पाने की हसरत हो गई, मुझे तुझसे क्या प्यार हुआ मुझे तो खुद से ही नफरत हो गई।

70- तुझे खुदा मान कर तुझ पर खुदा से ज्यादा भरोसा किया हमने, अब ये जो हाल हुआ तो सोचते हैं आखिर ये क्या किया हमने।

71- ऐसा नहीं की अब हमे कोई अपनी महफ़िलों में बुलाते नहीं अब हम जाते नहीं क्यूंकि तन्हाई के सिवाय हम किसी को चाहते नहीं।

72- भीड़ भरे शहर का तकनहा मकान हूँ मैं, किसी को कुछ भी कैसे बताऊँ बेज़ुबान हूँ मैं।

73- रातों में रोने का मज़ा ही अलग है ना कोई उन अश्क़ों पर हसने वाला होता है और ना ही ताने कसने वाला होता है।

74- मेरी गलती क्या है अक्सर मेरी तन्हाई मुझसे सवाल करती है, मेरी ख़ामोशी के पास अक्सर इसका कोई जवाब नहीं होता ।

75 – रास्ता जल्द ही कट जाए तो अच्छा है वरना अकेला चल पाने का अब हम में जज़्बा नहीं रहा।

76- ये जीने-मरने की बातें अब हमसे ना करना, हमने देख लिया है पहले भी की जीते वो है और मरते हम हैं।

77- आज भी तुझे याद करते हैं हम, तुझे सोच सोच कर यूँ ही वक़्त बर्बाद करते हैं हम।

78- खुद को अकेला महसूस करने लगा हूँ मैं, जब से तुझसे दूर हुआ हूँ मैं।

79- कभी जब गौर से देखोगे तो इतना जान जाओगे, कि तुम्हारे बिन हर लम्हा हमारी जान लेता है।

80- जीने का अब कोई अरमान तो नहीं है पर कम्बख्त ये तेरे आने की उम्मीद हमे मरने नहीं देती।

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