25 Sad Bichadna Shayari

25 Sad Bichadna Shayari

1- मोहोब्बत का फितूर उतरना भी ज़रूरी था, अगर मिलना ज़रूरी था तो बिछड़ना भी ज़रूरी था।

2- संवर गए थे संग तेरे अब बिखर गए हैं, साथ थे तो जान थे अब जान से बिछड़ गए हैं।

3- तू दिल पे बोझ ले के मुलाक़ात को न आ, मिलना है इस तरह तो बिछड़ना क़ुबूल है।

4- मैं मोती तू धागा है, तेरे बिना भला मेरा वजूद क्या है।

5- टूटेंगे मालूम था, मगर इस तरह बिखरेंगे पता ना था, अलग हो जाएंगे मालूम था मगर इस क़दर बिछड़ेंगे पता ना था।

6- तुझसे मोहोब्बत भी है सिर्फ गीले ही नहीं, सिर्फ गम एक बात का है की बिछड़ने से पहले एक बार मिले ही नहीं।

7- जुदा भी हुआ तू तो बड़ा संभल कर, यादें मुझ पर ही छोड़ गया खुद को अलग कर।

8- मोहोब्बत से अब थोड़ा संभल कर रहता हूँ, तुझसे अलग होने के बाद अब सबसे अलग ही रहता हूँ।

9- साथ तेरे चलने की खातिर ज़माने से पिछड़ गए हैं, तूने अपनाया नहीं तेरे चक्कर में अपनों से भी बिछड़ गए।

10- आसान तो नहीं रहा बेशक बिछड़ना, पर बिछड़ना बेशक ज़रूरी था शायद।

11- तेरे साथ चलते-चलते नाजाने हम किदर गए है, साथ थे तो संवर गए थे बिछड़े तो बिखर गए हैं।

12- नींदे बिछड़ गई आँखों से फिर आंसुओं का इनसे याराना हुआ, तेरे संग था तो ठीक था तेरे जाने के बाद देख क्या हुआ।

13- इंसान बिछड़ता है यादें याद रह जाती है, ज़ुबान बदल जाती हैं बस बातें याद रह जाती है।

14- मेरी छोड़ ये बता बिछड़ने का गम क्या तुझे भी हुआ, क्या कभी ठीक ना होने वाला ज़ख़्म तुझे भी हुआ।

15- कभी वापस जुड़ेगा भी दिल को ऐसे तो कर गया है, कहीं एक पल भी उसे भुला ना दूँ यादों को पास मेरे छोड़ कर गया है।

16- तेरे बिछड़ने के बाद क्या हुआ इसका तुझे कुछ भी पता नहीं, तेरा कुछ गया नहीं और मेरा कुछ बचा नहीं।

17- टूटा पड़ा हूँ लगभग पूरा का पूरा, वो तो तेरी आने की उम्मीद है जो मुझे कहीं लिए जा रही है।

18- रास्ते दोनों के अब बदल गए हैं, हम अभी भी बिखरे हुए हैं वो बिलकुल संभल गए हैं।

19- ख्वाहिश रहती थी तुझे हर दिन देखने की तूने आखिर ये दिन भी दिखा दिया, मुझे डर था तुझसे बिछड़ने का तूने आखिर ये डर भी मिटा दिया।

20- मुझे अब भूख कहाँ लगेगी भला तेरे बिछड़ने का गम मुझे खता रहता है।

21- पहले जो अकेला नहीं छोड़ता था आज अकेला कर गया है, सवेरे सी थी मेरी ज़िन्दगी आज उसमे तू अँधेरा कर गया है।

22- पकड़ कर आसरा दीवार के एक कोने का, सोचता हूँ क्या तुझे भी फ़र्क़ पड़ता होगा मेरे होने ना होने का।

23- पीछे मुढ़ कर तुझे देखना तो चाहते थे पर तेरी बात याद आ गई की तू मुझे देखना भी नहीं चाहता।

24- मिलना इत्तेफ़ाक़ था बिछड़ना नसीब था, वो उतना ही दूर हो गया जितना क़रीब था।

25- सुनों सिर्फ दिल से नहीं यादों से भी निकलना, अब हकीकत में नहीं मिलोगे तो ख्वाबों में भी मत मिलना।

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