24+ Best Zindagi ka Safar Shayari

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1- टूटा हूँ ठोकर भी खा चूका दर-बदर मैं, पर छोड़ ना सका कुछ अलग ही नशा है ज़िन्दगी के सफर में।

2- कैसा होगा ज़िन्दगी का सफर किसे इल्म है, अगर गुज़रे तो जन्नत है जो ना गुज़रे तो सजा-ऐ-ज़ुल्म है।

3- ज़िन्दगी से मौत तक के सफर को ही ज़िन्दगी कहते हैं।

4- कभी शहर है तो कभी गावं है, ये ज़िन्दगी है कभी धुप है तो कभी छाव है।

5- सफर ऐ ज़िन्दगी हर क़दम कुछ नया दिखाती है, कभी जीत से मिलाती है तो कभी सिखाती है।

6- ये ज़िन्दगी वो दौड़ है जहाँ चलना भी ज़रूरी है, यहाँ हवाओं में उलझना भी ज़रूरी है और अंगारों में जलना भी ज़रूरी है।

7- जिस पर सिर्फ खुशियां उगे ज़िन्दगी वो पेड़ नहीं है, गम काफी मिले मगर ज़िन्दगी मुझे तुझसे कोई खेद नहीं है।

8- खुशियां खरीदी नहीं जा सकती वो कोई सामान नहीं है, ज़िन्दगी बेहद खूबसूरत है मगर बिलकुल भी आसान नहीं है।

9- बदनामी से बेहतर गुमनामी में जी लेंगे, बेईमानी से नाम कमाने से बेहतर हम बेनामी ही जी लेंगे।

10- धुप खिलती गई बादल छंटते गए, मुश्किलें बहुत आई पर क़दम बढ़ते रहे और रास्ते कटते रहे।

11- कर रही है अभी तय सफर ज़न्दगी, कहीं ना कहीं तो होगी बसर ज़िन्दगी।

12- कभी सांस थकी तो कभी सर दुखा, ज़िन्दगी वो सफर है जहाँ कभी पैर थके तो कभी दिल दुखा।

13- हमदर्द के दर्द में हम संग में थम गए, आखिर हुआ यूँ हम अकेले ही रह गए वो किसी और के संग गए।

14- सफर ज़िन्दगी का बिना ठहरे खूब चले, जब संग मेरे मेहबूब चले।

15- रात चलने सीखो सवेरे चलना सीखो, कोई साथ नहीं देगा कोई हाथ नहीं देगा एक काम करो अकेले चलना सीखो।

16- जानता हूँ काफिर हूँ मैं, सबसे अलग रास्ते पर चलने वाला मुसाफिर हूँ मैं।

17- मंज़िलों की तलाश में तरसना सीख लिया, ज़िन्दगी को जीना सीख लिए जब मुश्किलों में हसना सीख लिया।

18- अलग चला आहिस्ते चला, पर जब चला खुद के बनाए रास्ते पर चला।

19- ये उमर, वक्त, रास्ता, गुज़रता रहा सफ़र का ही था मैं सफ़र का रहा।

20- कुछ बाते सभी को मालूम है कुछ रखे मैंने राज़ भी है, ठोकर लाखों खा चूका मगर मंज़िल की भूख आज भी है।

21- जाने किस किस चीज़ की खातिर भटक रहे हैं, जिस रास्ते पर नज़र मारो हर जगह मुसाफिर भटक रहे हैं।

22- कुछ ऐसा छोड़ जाओ असर ज़िन्दगी का, की मरने के बाद भी याद रहे तुम्हारा सफर ज़िन्दगी का।

23- थक गया हूँ तेरी नौकरी से ऐ ज़िन्दगी अब बेहतर होगा तू मेरा हिसाब कर दे।

24- मंजिल दूर और सफ़र बहुत है छोटी सी जिन्दगी की फिकर बहुत है मार डालती ये दुनिया कब की हमे लेकिन माँ की दुआओं में असर बहुत है।

25- मत पूछना कहाँ से निकले कहाँ पहुंचे हम, खुश है समझदार नहीं जो ज्यादा सोचें हम।

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