26 Very Sad Friendship Shayari

26 Very Sad Friendship Shayari
sad friendship shayari
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1- ऐसा कोई रिश्ता ना रहा जिसमे दगा ना मिली, ज़ख्म बहुत मिले कम्बख्त दवा ना मिली।

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2- दोस्ती पर विशवास ना करने की वजह बहुत है, वहां भरोसा बहुत कम और दगा बहुत है।

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3- मेरा दर्द-ऐ दिल खुशमन हो जाए, दगाबाज़ दोस्त से बेहतर तो एक दुश्मन हो जाए।

zindagi aur dosti shayari
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4- बात जो दिल में है उसे दबाया मत करो, दुश्मनी निभा कर मुझे अपना दोस्त मत बताया करो।

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5- कौन दूर कौन संग दिखा दिया है, दोस्त कौन दुश्मन कौन सभी ने रंग दिखा दिया है।

sad friendship shayari 2 line
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6- पीठ पीछे नफरत मुँह पर दोस्ती दिखाते हैं, बस ऐसे ही आज कल लोग दोस्ती निभाते हैं।

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7- भरोशानहीं करता किसी पर ये मेरा दोष नहीं है, एक मुसीबत आते ही दिखा दिया सभी ने कोई मेरा दोस्त नहीं है।

goodbye broken friendship shayari in hindi
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8- दिल में जलन मुँह पर बधाई दिखती है, दोस्ती और वफ़ा में मुझे बस तबाही दिखती है।

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9- भला कौन पराया और कौन सागा है, जहाँ नज़र फेरों हर जगह दगा है।

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10- मतलब मुलाक़ात की वजह है जनाब बिना मतलब के तो आज कल लोग खुदा से भी नहीं मिलते।

11- भला बदला क्या है अलग क्या है, दगाबाज़ दोस्त और दुश्मन में फ़र्क़ क्या है।

12- हम तो बिछड़े थे तुम्हे अपना एहसास दिलाने के लिए, तुमने हमारे बिना ही जीना सीख लिया।

13- ये दोस्ती का गणित है साहब यहाँ दो में से एक भी जाता है तो एक भी नहीं बचता।

14- खंजर कीतने हैं पीठ पर गिन नहीं पाओगे, हालांकि इतना बता दूँ की दोस्त मेरे ज़्यादा नहीं थे।

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15- नज़दीक जा कर समझ गया हूँ कौन क़रीबी है मेरा, बस इसीलिए दोस्ती और वफ़ा के मैं पास नहीं जाता।

16- एक दफा सुन लो मैं रोज़ नहीं बताता, संग रह लेता हूँ सभी के पर किसी को दोस्त नहीं बनाता।

17- जो तरक्की देख कर जलना शुरू कर दे, बेहतर है ऐसे दोस्त से दूर होकर चलना शुरू कर दे।

18- समय का पता नहीं चलता दोस्तों के साथ, मगर दोस्तों का पता चल जाता है वक़्त के साथ।

19- यहाँ सब गद्दार है, यहाँ जो दोस्ती की दुनिया है यहाँ सब मतलब के यार है।

20- वो पत्थर कहाँ मिलता है बताना ज़रा ऐ-दोस्त, जिसे दिल पर रख कर लोग एक दुसरे को भूल जाते है।

21- रिश्ता निभाने का हुनर हमने दुश्मनों में देखा है दोस्तों में तो बस दग़ाबाज़ी देखी है।

22- दोस्ती बचपन में निभाते थे आज सब मतलब निभाते हैं।

23- मतलब का सिक्का अब इस तरह चलता है, अब दोस्त से दोस्त नहीं मिलते मतलब से मतलब मिलता है।

24- सच्चे दोसतों की एक निशानी होती है, वो मिलने के लिए वक़्त और मतलब नहीं ढूंढते।

25- पहले शाम निकलती थी साथ बैठ कर, अब काम निकलते हैं साथ बैठ कर।

26- वाकिया कड़वा ही मगर सच्चा है, दो चेहरे वाले दोस्तों की दोस्ती से अकेलापन अच्छा है।

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