31 Best Strong Confident Woman Quotes In Hindi

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वह माता के समान हमारी रक्षा करती है, मित्र और माता के समान हमें शुभ कार्यों के लिए प्रेरित करती है, बाल्यावस्था से लेकर मृत्युपर्यंत वह हमारी संरक्षिका बनी रहती है। नारी सृष्टि के आरम्भ से अनन्त गुणों की आगार रही है।

वह दया, करुणा, ममता और प्रेम की पवित्र मूर्ति है और समय पड़ने पर प्रचण्डचण्डी भी। नारी मनुष्य के जीवन की जन्मदात्री है।

जो स्त्री का अपमान करता है, वो माँ का अपमान करता है, जो माँ का अपमान करता है, वो भगवान का अपमान करता है, और जो भगवान का अपमान करता है, उसका पतन निश्चित है।

विश्व में कोई वस्तु इतनी मनोहर नहीं, जितनी की सुशील और सुंदर नारी।

जहां नारियों का आदर होता है, वहां देवता निवास करते हैं।

जिस समाज में स्त्री का सम्मान नहीं होता, उस समाज का शीघ्र पतन निश्चित है !

एक नारी किसी भी समय, कही भी, कोई भी स्थिति का सामना बहादुरी से कर सकती है।

मनुष्यों को बेहतर ये समझना चाहिए कि, महिलाओं की ताकत के आधार पर ही जिंदगी की लड़ाई जीतने की सम्भावनाएं होती है ।

नारी के बिना किसी भी पुरुष का संसार सदैव ही अधूरा है।

असंख्य शक्तियां होने के बावजूद भी नारी को समाज में अबला ही समझा जाता है।

इस दुनिया में एकमात्र स्त्री ही है, जो अपने कर्तव्य से कभी मुंह नहीं मोड़ती है।

किसी भी स्त्री को प्रेम से जीता जा सकता है, सिवाय उसे समझने में आपकी पूरी जिंदगी निकल सकती है।

समाज में जब तक नारियां सुरक्षित रहेंगी तभी हमारा भविष्य सुरक्षित रहेगा।

किसी भी महिला के आंसू एक कठोर हृदय वाले पुरुष को भी पिघला सकते हैं।

जिस घर में औरतों की खुशियों का ख्याल रखा जाता है, वहां कभी विपदा नहीं आती है।

जब समाज में एक पुरुष शिक्षित होता है, तब वह केवल एक व्यक्ति होता है। लेकिन जब आप किसी स्त्री को शिक्षित करते हैं तो आप एक पीढ़ी को शिक्षित करते हैं।

समाज जब नारी को शक्ति समझकर पूजता है, तब वह उन्नति करता है।

नारी की शारीरिक क्षमता जरूर कमजोर हो सकती है लेकिन उसकी वाणी में अनंत सामर्थ्य मौजूद होता है।

पुरुष जब किसी स्त्री से प्रेम करता है तो वह उसे थोड़ी सी ही खुशियां देता है, लेकिन जब कोई स्त्री किसी पुरुष से प्रेम करती है तो वह उस पर अपना सब कुछ न्योछावर कर देती है।

नारी किसी भी समाज की सच्ची और वास्तविक शिल्पकार होती हैं।

शक्ति महिलाओं की प्रतीक है । प्रकृति की बेहतरीन और सबसे सुन्दर रचना है । इनके बिना कोई निर्माण संभव नहीं है

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समाज में नर और नारी एक सिक्के के दो पहलू है। जिनमें कोई अंतर नहीं होता है।

कोई राष्ट्र कभी आगे नहीं बढ़ सकता है, यदि उस समाज की महिलाएं पिछड़ी हुई हैं।

स्त्री अपने कंधो पर सब कुछ ले जाती है, और मुस्कुराते हुए अंत में गंतव्य तक पहुँचाती भी है ।

नारी प्रेम, करुणा, दया और ममता की मूरत है लेकिन समय आने पर वह चंडी का रूप भी धारण कर लेती है।

नारी का सम्मान करना पुरुषों का परम कर्तव्य है।

हर एक व्यक्ति के अच्छाई और तरक्की के पीछे एक औरत का हाथ है ।

नारी यदि वर्तमान के साथ भविष्य को भी अपने हाथ में ले ले तो वह अपनी शक्ति से बिजली की तड़प को भी लज्जित कर सकती है।

नारी जाति को खाली हाथ कभी नहीं बैठना चाहिए।

नारी पुरुष की गुलाम नहीं, सहधर्मिणी, मित्र, अर्धांगिनी (पत्नी) है।

स्त्री का शारीरिक सामर्थ्य भले ही कम हो, उसकी वाणी में असीम सामर्थ्य है।

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