TOP 7 Short Moral Stories in Hindi for Class 5

TOP 7 Short Moral Stories in Hindi for Class 5

शेर और लोमड़ी

प्रारम्भ में लोमड़ी ने शेर के बारे में सिर्फ सुना था लेकिन उसे कभी देखा नहीं था। घोडा ने उसे बताया, “शेर बहुत बड़ा और शक्तिशाली होता है।” जेबरा ने कहा, “वह हम पर हमला करके हमें मार कर खा जाता है।”

जिराफ ने कहा, “उसकी गर्दन तो ऐसी है कि हम सूखे पत्ते की तरह काँपने लग जाते हैं।” ये सब बातें सुनकर लोमड़ी बहुत डर गई। एक दिन लोमड़ी ने मुड़कर देखा तो सामने से शेर आ रहा था।

वह डर गई और खड़ी हो गई। शेर ने उसे सूंघा और हल्का सा गरजा, फिर वह चुपचाप चला गया। लोमड़ी ने तब कहीं जाकर राहत की साँस ली। दूसरे दिन वह नदी के दूसरे किनारे पर खड़ा था।

उसे देखते ही लोमड़ी फिर डर गई लेकिन इस बार उसका डर पहले से कुछ कम था। तीसरे दिन लोमडी अपने दोस्तों के साथ खेलते-खेलते शेर से टकरा गई। उसने थोड़ा-सा साहस इकट्ठा किया और थोड़ा झिझकते हुए कहा,

“मुझे माफ कर दीजिए, श्रीमान्।” शेर मुस्कुराकर बोला, “कोई बात नहीं।” जल्द ही लोमड़ी का डर गायब हो गया और अब वह उससे बिना डरे बात करने लगी।

शिक्षा: स्वयं परखे बिना कोई भी बात नहीं माननी चाहिए।

ईमानदार लकड़हारा

रामू एक ईमानदार लकड़हारा था। एक दिन पेड़ की एक शाखा काटते काटते उसकी कुल्हाड़ी अचानक नदी में गिर गई। नदी के किनारे खड़ा होकर वह फूट-फूटकर रोने लगा।

जल्दी ही एक देवी नदी में से प्रकट हुईं और उन्होंने पहले उसे सोने की कुल्हाड़ी और उसके बाद चांदी की कुल्हाड़ी देने को कहा। रामू ने दोनों कुल्हाड़ियाँ लेने से इंकार कर दिया।

अब उसे देवी ने असली कुल्हाड़ी दी और रामू ने वह कुल्हाड़ी खुशी-खुशी ले ली। उसकी ईमानदारी से खुश होकर उस देवी ने उसकी कुल्हाड़ी के साथ बाकी दोनों कुल्हाड़ियाँ भी दे दी।

उसने यह सारी घटना अपने पड़ोसियों को बताई। उनमें से एक के मन में लालच आ गया। वह भी नदी के पास गया तथा उसने अपनी कुल्हाड़ी नदी में फेंक दी और रोने का नाटक करने लगा।

तब देवी ने प्रकट होकर उसे जब सोने की कुल्हाड़ी दो तो उसने लपककर वह कुल्हाड़ी लेने की कोशिश की। देवी को गुस्सा आ गया और वह गायब हो गईं। इस प्रकार वह अपनी असली कुल्हाड़ी भा। गँवा बैठा।

शिक्षा: भगवान हमेशा ईमानदार लोगों को ही पसन्द करते हैं तथा उनकी ही मदद करते हैं।

तैरने की चाहत

बसंत का सुहाना मौसम था। सर्दी की ऋतु बीत चुकी थी और गर्मियाँ अभी शुरू नहीं हुई थीं। एक बच्चा नदी किनारे टहल रहा था कि अचानक उसका तैरने का मन हुआ। उसने कपड़े उतारकर किनारे पर रखे और नदी में कूद गया।

पानी में उतरते ही उसे महसूस हुआ कि पानी बहुत ठंडा है। यदि इसमें कुछ देर और रहा तो ठंड लग जाएगी। इसलिए उसने जल्दी से बाहर निकलना चाहा,

लेकिन नदी उस समय अपने उफान पर थी और उसे अपने साथ बहाए लिये जा रही थी। लड़के ने बाहर निकलने की बहुत कोशिश की पर निकल नहीं पा रहा था। वह जोर-जोर से चिल्लाने लगा,”बचाओ, बचाओ !

मैं डूब रहा हूँ।” नदी के पास से एक व्यक्ति गुजर रहा था। वह बोला, “मूर्ख बालक! तुम्हें समझ होनी चाहिए कि यह तैराकी का मौसम नहीं है।

यदि तुम्हारे माता-पिता तुम्हें ऐसे तैरता हुआ देखते तो कितना नाराज होते, इसका तुम्हें अंदाजा भी नहीं है।” बच्चा बोला,”अंकल! पहले मुझे बाहर निकालो, फिर ऐसी गलती नहीं करुंगा।

शिक्षा: हर काम का एक सही समय होता है।

झूठ की सजा

एक बार एक आदमी अपने पालतू बंदर के साथ समुद्री जहाज़ में यात्रा कर रहा था। अचानक तूफान आ जाने के कारण जहाज़ पलटने लगा। सभी लोगों के साथ-साथ वह बंदर भी पानी में कूद गया।

एक डॉलफिन ने उस बंदर को मनुष्य समझकर बचा लिया। डॉलफिन उसे अपनी पीठ पर बैठाकर किनारे की ओर लेकर जा रही थी। ग्रीस देश की सीमा पार करते ही डॉलफिन ने बंदर से पूछा, “क्या तुम एथेंस के रहने वाले हो?”

बंदर ने झूठ बोल दिया, “हाँ।” डॉलफिन ने पूछा, “क्या तुम्हें पिराकस पता है?” बंदर बोला, “हाँ, वह मेरा अच्छा मित्र है।” बंदर ने सोचा कि वह एक व्यक्ति का नाम है जबकि पिराकस एक बंदरगाह है।

डॉलफिन यह सुन समझ गई कि बंदर झूठ बाल रहा है। उसने पानी में डूबकी लगाई और बंदर पानी में डूबकर मर गया।

शिक्षाः झूठ से केवल क्षणिक लाभ हो सकता है; उससे प्राय: भारी नुकसान होता है।

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मरता क्या न करता

तेज़ बारिश में मछली पकड़ना खतरनाक होने के बावजूद पॉल मछली पकड़ने के लिए घर से निकल पड़ा क्योंकि वह अपने परिवार को भूख से तड़पता नहीं देख सकता था।

वह नदी पर गया और एक किनारे से दूसरे किनारे तक जाल फैला दिया। पानी का बहाव बहुत तेज था। उसने जाल की रस्सी का एक सिरा पत्थर से बांध दिया ताकि जाल हिला-हिला कर वह मछली पकड़ सके।

जाल में फंसी मछली जब डर से आतंकित होकर बार-बार उछलकर जाल से से छुटकारा पाने की कोशिश कर रही थी तो उसके कारण किनारे पर जाल में लगी मिट्टी पानी में मिल रही थी।

तभी पास से गुज़रता हुआ एक व्यक्ति बोला, “तुम इस नदी को क्यों गंदा कर रहे हो? ऐसा करने से हमारे पीने का पानी भी गंदा हो रहा है।” पॉल ने कहा, “यदि मैं ऐसा नहीं करूँगा तो मेरा परिवार भूख से तड़प-तड़प कर मृत्यु का ग्रास बन जाएगा।

शिक्षा: अपने जीवन का मार्ग खुद बनाना पड़ता है।

ग्रामीण चूहा और शहरी चूहा

एक बार की बात है। एक गाँव में रहने वाले चूहे की दोस्ती शहर के एक चूहे से हो गई। एक दिन ग्रामीण चूहे ने शहरी चूहे को खाने पर बुलाया। उसने उसे जौ और मकई के दाने परोसे जो वह खेतों से लाया था।

जब वे दोनों शहर आए तो शहरी चूहे ने अपने दोस्त के सामने शहद, फल, पनीर और बिस्किट रखे। जैसे ही उन्होंने खाना शुरू किया वैसे ही एक आदमी ने दरवाजा खोला और दोनों चूहे डर के मारे अपने बिल में भागकर छुप गए।

बहुत इंतजार के बाद जब उन्होंने दोबारा खाना शुरू किया तो अचानक एक औरत ने प्रवेश किया और कुछ ढूँढना शुरू कर दिया। दोनों चूहे फिर से भागे और छिप गए। ग्रामीण चूहा परेशान होकर बोला,

“मैं अपने गाँव का सीधा-साधा खाना खाकर ही खुश हूँ। कम से कम वहाँ तुम्हारी तरह हर पल एक खतरा नहीं उठाना पड़ता। मैं जौ और मकई खाकर भी सन्तुष्ट हूँ।

लेकिन तुम इतना अच्छा खाना खाकर भी संतुष्ट नहीं हो क्योंकि इस खाने के लिए तुम हर रोज़ डर और खतरों का सामना करते हो।

शिक्षाः आजादी और भयहीनता खुशी की अनिवार्य शर्ते हैं।

बिल्ली व बुलबुल

एक छोटे से गाँव में एक बेकर (केक बनाने वाला) रहता था उसके पास एक पालतू बिल्ली थी। वह उस बिल्ली को बहुत प्यार करता था।

लेकिन जब वह म्याऊँ-म्याऊँ की आवाज करती थी तो वह उसे मारकर दरवाजे से बाहर निकाल देता था। एक बार उसने एक बुलबुल खरीदी। वह बड़ी आजादी से पूरे घर में गाना गाती हुई घूम रही थी।

तभी बिल्ली ने उससे पूछा, “तुम कहाँ से आई हो?’ बुलबुल ने उत्तर दिया, “गांव के मेले से।” बिल्ली चिल्लाकर बोली, “तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई शोर मचाने की? इसी घर में जन्म लेने के बावजूद मालिक ने मुझे कभी गाने नहीं दिया।

मैं अगर गाती हूँ तो वे मुझे सजा देते हैं।” बुलबुल ने व्यंग्यपूर्ण स्वर में कहा, “एक बिल्ली और एक बुलबुल में कोई मुकाबला नहीं है।

मेरी आवाज़ मधुर है और तुम्हारी आवाज दूसरों को परेशान करने वाली है। इसलिए तुम मेरे साथ मत लड़ो। बिल्ली ने खिसियाकर अपनी पूँछ हिलाई और चली गई।

शिक्षाः दूसरों को कभी नीचा नहीं दिखाना चाहिए।

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nitish sundriyal

Nitish sundriyal is a co-founder of bookmark status. He is passionate about writing quotes and Stories. Nitish is also a verified digital marketer (DSIM) by profession. He has expertise in SEO, Social Media Marketing, and Content marketing.

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