ruthe hue ko manane ki shayari

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तुम खफा हो गए तो कोई ख़ुशी न रहेगी, तुम्हारे बिना चिरागों में रोशनी न रहेगी, क्या कहे क्या गुजरेगी इस दिल पर, जिंदा तो रहेंगे पर ज़िन्दगी न रहेगी।

दोस्ती में कभी तेरा मेरा नहीं होता दोस्ती में कभी कोई एक दूसरे से दूर नहीं होता दोस्ती तो होती है दो दिलों की जान दोस्ती में कोई एक दोस्त कभी नाराज नहीं होता।

दिल से तेरी याद को जुदा तो नहीं किया, रखा जो तुझे याद कुछ बुरा तो नहीं किया, हम से तू नाराज़ हैं किस लिये बता जरा, हमने कभी तुझे खफा तो नहीं किया।

नाकाम थीं मेरी सब कोशिशें उस को मनाने की पता नहीं कहां से सीखी जालिम ने अदाएं रूठ जाने की।

छोड़ो ये गुस्सा चलो कुछ इश्क़ के गीत गाते हैं हमेशा याद रह जाये कुछ ऐसा कर जाते हैं।

तेरे आंसू भी मेरे लिए कीमती हैं अब तो मान जा क्यों तू इतनी ज़िद्दी हैं।

तेरी खुशी के लिए बहुत मेहनत करते हैं हम आप हो के नाराज़ होने का कोई मौका नहीं छोड़ते।

प्यार मिटता नहीं, मिटने के काबिल बना देता है. प्यार मरता नहीं, मरने के काबिल बना देता है. दिल दे कर जानते है लोग एक बात जो पुरानी है कहते जिसको इश्क वो ज़हर का पानी है।

और कितना दर्द का एहसास दीलौंगे मुझे शायद अभी तक तसल्ली नहीं हुई होगी तुझे।

दिल्लगी तक तो ठीक था लेकिन ये ठीक नहीं दूर रह कर कहती हैं क्या मैं तुम्हारे पास नहीं।

तुम रूठो तो तुम्हे मनाने आ जाएंगे कई हम रूठे भी तो बताओ किस के भरोसे।

माने से रुठने की जरूरत ही क्यों हो जब मेरे अपने ही मेरे बने रकीब हो।

नाकाम थीं मेरी सब कोशिशें उस को मनाने की पता नहीं कहां से सीखी जालिम ने अदाएं रूठ जाने की।

कीन नहीं तो आजमाके देख ले, दर्द तेरी जुदाई का है, तू पास आके देख ले।

बिगड़ी हुई तक़दीर को सवारने में लगा हूँ, मेरी खुशी मुझसे रूठी है, में मानाने में लगा हूँ।

कब तक रह पाओगे आखिर यूँ दूर हमसे, मिलना पड़ेगा कभी न कभी ज़रूर हमसे, नज़रें चुराने वाले ये बेरुखी है कैसी, कह दो अगर हुआ है कोई कसूर हमसे।

खा है आज मुझे भी गुस्से की नज़र से, मालूम नहीं आज वो किस-किस से लड़े है।

यार मेरे तू मुझसे ना रूठ जाया करो, मेरा दिल नहीं लगता तेरे बिना, मुझसे दूर ना जाया करो।

रूठे हुये हो क्यों में मनाने को हु तैयार कीमत बता दो मान जाने की में जिन्दगी लुटाने को हु तैयार।

रूठने-मनाने का, सिलसिला कुछ यू हुआ। मान गया था मगर, फिर रूठने का दिल हुआ।

लविदा कहने की जरुरत पड़ गई, मेरी जान मुझसे रूठी है, इसलिए मरने की चाहत जाग गई।

जब भी उसे दिल का हाल बताना चाहा उसके होठों से वक़्त न होने के बहाने निकले।

आज खुद को भुलाने को जी कर रहा है, बेवजह रूठ जाने को जी कर रहा है।

बिन बात के ही रूठने की आदत है, किसी अपने की चाहत पाने की चाहत है।

आप खुश रहें, मेरा क्या है, में तो आईना हूँ मुझे टूटने की आदत है।

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