30 Best pati patni quotes in hindi

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1- लाख पाने की कोशिश में तुझे मैंने अपने एक अकेले को खो दिया कहीं।

2- उसे अपने वजन बढ़ने की चिंता बहुत थी शायद इसीलिए उसने मुझ पर तरस नहीं खाया।

3- आज इतने साल बाद तक भी मुझे समझ नहीं आता, क्या उसे मेरे हाल पर ज़रा भी तरस नहीं आता।

4- ज़िन्दगी रेगिस्तान हो गई तेरे जाने के बाद, ढूंढते है तुझे हम पानी की तरह।

5- तरस गया हूँ तेरे एक झलक के लिए, तेरी मोहोब्बत की तलब अलग से लिए।

6- आँसू निकले नहीं बरसे है तेरे लिए, हम तरसे नहीं हर पल तड़पे हैं तेरे लिए।

7- मैं तेरे याद में जलकर उस तरह पिघल रहा हूँ जिस तरह मोम पिघलती है आग में जलकर।

8- वो हस रहा था बहुत मुझे तरसता देख, मैं खुश था बहुत उसे हसता देख।

9- अभी हाल फिलहाल नहीं तो शायद मेरे बाद में सनम, तरसोगे तुम भी यूँ ही किसी की याद में सनम।

10- तलबगार से कोई पूछे की आखिर शराब क्या है, कोई हमसे आकर पूछे की आप क्या है।

11- कुछ ख़ास तो नहीं पूछना था बस ये पूछना था की अब तुम हमे पूछते क्यों नहीं।

12- तलबगार बहुत से रहे होंगे तेरे साकी मगर हम सा प्यासा शायद ही कोई रहा होगा।

13- उसे मुझ पर तरस तक नहीं आता मोहोब्बत क्या ख़ाक आएगी।

14- वो जानती थी उसके जाने का जख्म फिर हाल पूछ कर उसने नमक छिड़क दिया।

15- ख्वाहिशों से भरा पड़ा है घर इस क़दर की रिश्ते ज़रा सी जगह को तरसने लगे हैं।

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16- निगाह देखने को तरसती है हाथ छूने को तरसते है, ये क़दम रोज़ तेरी और जाने को चलते हैं।

17- तेरी रुस्वाइयाँ याद आती है तो गुस्सा आ जाता है, तेरा चेहरा याद आता है तो प्यार आ जाता है।

18- हालत और हालात दोनों खराब ही है, अब मेरे दोस्त और दुश्मन दोनों शराब ही है।

19- वो ये समझ नहीं सकती की मैं समझ सकता हूँ की वो मुझे समझ नहीं सकती।

20- तरसती है दिल की ये बंजर ज़मीन जो तू आ जाए तो फसल आ जाए।

21- करीबन साल हो चूका है तुझे गए हुए फिर भी याद तेरी आती रहती है।

22- तेरी तरह हमने भी तुझे अपना समझना छोड़ दिया, अब संभालना सीख चुके है हमने तरसना छोड़ दिया।

23- अच्छा नाराज़ रहना चाहते हो तो नाराज़ रहो, बस मुझसे दूर ना जाओ मेरे पास रहो।

24- तड़प क्या होती है कोई मेरे दिल से पूछे, जो उसके नाम लेने के सिवाय कुछ और काम करने का नाम ही नहीं लेता।

25- निगाहें तरसती रही ताउम्र तेरे दीदार को, आँखें बंद होने को आई अब तो देखने आजा मुझे एक बार को।

26- मुझ पर तरस ना खाओ ये सोच कर के मैं भूखा हूँ, मैंने इस ज़माने में रह कर ताने बहुत खाए हैं।

27- तरस आता है मासूम पलकों पर मुझे इतना भीगती है कहीं बीमार ना हो जाए।

28- तरस रहे हैं उसकी एक झलक के लिए, आशियाने ज़मीन पर और हौंसले फलक के लिए।

29- अब इतने बदल जाएंगे की लोग हमे पहले सा देखने को तरस जाएंगे।

30- दीदार को तरस जाओगे तुम मगर हम दूर दूर तक नज़र नहीं आएँगे।

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