29+ Best Mehfil Shayari – (महफ़िल पर शायरी)

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Mehfil Shayari
Mehfil Shayari in hindi

1- दूर रहता हूँ उन महफिलों से मैं जहाँ मेरा खुश रहना उन्हें दुखी कर जाता है।

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2- तुम्हारा जिक्र हुआ तो महफ़िल छोड़ आये गैरों के लबों पे तुम्हारा नाम अच्छा नहीं लगता।

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3- मत बुलाया करो अपनी महफिलों में हमे तालियां रूठ जाती है हमारे आने से।

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4- महफ़िलें उनकी बातें हमारी, बस कुछ ऐसी ही है शख्सीयत हमारी।

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5- क्या कहें चुप रहना ही जवाब बेहतर है, तेरी आदत से अच्छा तलब इस शराब की बेहतर है।

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6- महफ़िल में शरीक हुए मगर सबके साथ बैठ कर भी कहीं ना कहीं अकेले ही खड़े थे।

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7- महफ़िल पर नज़र सभी की टिकी हुई थी, तू जब तक थी रौनक तभी तक थी।

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8- महफिलों में ग़मों का इज़हार मत करना, दिलासा नहीं मज़ाकों का तमाचा मिलेगा।

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9- आसान है अकेले में इज़हार करना, मुश्किल है जनाब अपनी चाहत को महफिलों में प्यार करना।

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10- हसीनाएं हज़ार थी महफ़िल में मगर दिल और नज़र बस तुझ पर रुक गए।

11- तुम्हारा जिक्र हुआ तो महफ़िल छोड़ आये, गैरों के लबों पे तुम्हारा नाम अच्छा नहीं लगता।

12- महफ़िल में सब थे पर कोई नहीं था, रौनक ही नहीं थी जो तू ही नहीं था।

13- ये महफ़िल है इसका दस्तूर यही है जनाब यहाँ सब होते है पर कोई किसी का नहीं होता।

14- बेइज़्ज़त ना किया करो महफ़िल में बुला कर मुझे, या तो नज़र मत आया करो या फिर नज़र अंदाज़ मत किया करो।

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15- फुर्सत निकाल कर आओ कभी मेरी महफ़िल में, लौटते वक्त दिल नहीं पाओगे अपने सीने में।

16- अगर देखनी है कयामत तो चले आओ हमारी महफिल मे, सुना है आज की महफिल मे वो बेनकाब आ रहे है।

17- चेहरे पर मुस्कराहट का नकाब लगा कर, रोता हूँ अकेले में महफ़िल में सभी को खुद को ठीक बता कर।

18- यूँ भरी महफ़िल में तनहा कैसे, यूँ संवर कर बैठे हुए भी तबाह कैसे।

19- दुश्मन को कैसे खराब कह दूं ,जो हर महफ़िल में मेरा नाम लेते है।

भरी महफ़िल मे दोस्ती का जिक्र हुआ, हमने तो.. सिर्फ़ आप की ओर देखा और लोग वाह-वाह कहने लगे।

20- यही सोच के रुक जाता हूँ मैं आते-आते, फरेब बहुत है यहाँ चाहने वालों की महफ़िल में।

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21- जहाँ महफ़िल भर गई सारे जहाँ के लोगों से, वही मेरा जहाँ ना जाने कहाँ रह गया था।

22- ना हम होंगे ना तुम होंगे और ना ये दिल होगा फिर भी हज़ारो मंज़िले होंगी हज़ारो कारँवा होंगे।

23- उनसे बिछड़े तो मालूम हुआ मौत क्या चीज है, ज़िन्दगी वो थी जो हम उनकी महफ़िल में गुजार आए।

24- बस एक चेहरे ने तनहा कर दिया हमे वरना, हम खुद में एक महफ़िल हुआ करते थे।

25- जाने कब-कब किस-किस ने कैसे-कैसे तरसाया मुझे, तन्हाईयों की बात न पूछो महफ़िलों ने भी बहुत रुलाया मुझे।

26- सजती रहे खुशियों की महफ़िल, हर महफ़िल ख़ुशी से सुहानी बनी रहे।

27- तू जरा हाथ मेरा थाम के देख तो सही, लोग जल जायेगें महफ़िल मे, चिरागो की तरह।

28- मुझे गरीब समझ कर महफिल से निकाल दिया, क्या चाँद की महफिल मे सितारे नही होते।

29- शरीक-ए-बज़्म होकर यूँ उचटकर बैठना तेरा, खटकती है तेरी मौजूदगी में भी कमी अपनी।

30- नींद भी नीलाम हो जाती हैं दिलों की महफ़िल में जनाब, किसी को भूल कर सो जाना इतना आसान नहीं होता।

31- इनमे लहू जला हो हमारा कि जान ओ दिल, महफ़िल के कुछ चिराग फ़रोज़ां हुए हैं।

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