30 Best Lafz Shayari – (दो लफ्ज़ शायरी)

30 Best Lafz Shayari – (दो लफ्ज़ शायरी)
Lafz Shayari
Lafz Shayari

1- प्यार ना सही तो नफरत के दो लफ्ज़ ही कह दो, हमे सिर्फ तुमसे नहीं तुम्हारी आवाज़ से भी प्यार है।

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2- मुझे भूख नहीं है इन चंद लफ़्ज़ों के पीछे गरीब अपनी मजबूरियां छुपा लेता है।

do lafz shayari
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3- रहता हूँ मैं फिलहाल ऐसी जगह, जहाँ लोग बुरा कह कर पूछते हैं बुरा तो नहीं लगा।

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4- लफ़्ज़ों का पर्दा था पीछे मजबूरी छुपी थी, मुस्कराहट का पहरा लगा था अंदर से रूह तक दुखी थी।

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5- वक़्त तेरे बिन अब बिता नहीं पाते, ये लफ्ज़ मजबूर तुझे बता नहीं पाते।

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6- मोहोब्बत दिल से होती है लफ़्ज़ों का तो काम ही झूठ कहना है।

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7- लफ्ज़ बयां नहीं कर पाएंगे तकलीफ मेरी, कभी-कभी सोचता हूँ मैं ज्यादा बुरा हूँ या फिर तक़दीर मेरी।

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8- जब वक़्त था कहने को लफ्ज़ नहीं थे अब जब लफ्ज़ है वक़्त निकल चूका है।

lafz shayari 2 line
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9- ये लफ्ज़ क्या बताएंगे कितनी मोहोब्बत है तुझसे कभी आ कर मेरे दिल की धड़कन सुनना।

10- ये जो मेरे लफ़्ज़ों को सुन नहीं पाते खामोश हो जाऊंगा तो इनके कान फट जाएंगे।

11- लफ़्ज़ों को तो मेरी सब सुन लेते है कोई खामोशी समझ जाए तो उसे खुदा बना लूँ।

12- लफ्ज़ सिर्फ कहने को मत कहा करो, वादे किया करो तो वादों पर ताउम्र रहा करो।

13- मेरे कान इतनी कड़वाहट झेल नहीं पाते नाजाने ये लोग इतनी कड़वाहट अपनी जुबां पर रखते कैसे हैं।

14- बस एक लफ्ज़ सुनाने के लिए ना जाने कितने नग्मे लिख दिए हमने ज़माने के लिए।

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15- खामोश बहार अंदर ज़ोरों से चीख रहा हूँ, लफ्ज़ नहीं ये दर्द लिख रहा हूँ।

16- जुबां से लफ्ज़ नहीं बस आखों से अश्क़ बह रहे हैं, मुझ बेगुनाह को सजा देने के लिए ना जाने लोग क्यों चीख-चीख कर कह रहे हैं।

17- अपनी जुबां से कह कर अपने ही कान से सुन रहा हूँ, मैं खो चूका एक मुसाफिर गुमराह हूँ।

18- दर्द इतने हैं की लफ्ज़ बता नहीं पाएंगे, चुभ इतने रहे हैं की तुम्हारे कान सुन नहीं पाएंगे।

19- जब तक बोल रहे हैं तब तक रिश्ता है समझ लो, खामोश हो जाएंगे तो रिश्ते ख़त्म हो जाएंगे।

lafz shayari image
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20- लफ़्ज़ों में ज़िक्र है दिमाग में फ़िक्र है, मैं यहाँ हूँ तड़प में ना जाने तू सुकून में किधर है।

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21- होठों पर लगाम थी कुछ कह नहीं पाए, आँखों ने रो-रो कर गम मेरा जग ज़ाहिर कर दिया।

22- लफ्ज़ मोहोब्बत का ना जाने कहाँ से सीखा दिल ने, जब से सुना है तेरी आवाज़ को तेरा ही नाम लेता रहता है।

23- अपने लफ्ज़ो पर ज़रा गौर कर के बता, उनमे लफ्ज़ कितने थे और तीर कीतने थे।

24- लफ़्ज़ों की इतनी औकात नहीं थी वो तो मेरी आँखें थी जिन्होंने दर्द बयां कर दिया।

25- तुझे लफ्ज़ सुनाई नहीं देते इसका मतलब ये नहीं की हम ज़िक्र नहीं करते, तू हमे पूछता नहीं इसका मतलब ये नहीं की हम तेरी फ़िक्र नहीं करते।

26- लफ़्ज़ों का इस्तेमाल ज़रा संभल कर कीजिए ये परवरिश का पक्का सबूत होते हैं।

27- उनसे मोहोब्बत इतनी ज़्यादा थी की बयां करते-करते पास हमारे लफ्ज़ कम पड़ गए।

28- ये जो लफ़्ज़ों की चोट मिल रही है तुमसे दर्द बहुत हो रहा है पर यकीन नहीं हो रहा।

29- ऐसा नहीं की मेरे पास जुबां नहीं है बस जो दर्द बयां कर दे पास मेरे अलफ़ाज़ नहीं है।

30- किसी ने पूछा इतना अच्छा कैसे लिख लेते हो मैंने कहा दिल तोड़ना पड़ता है लफ़्ज़ों को जोड़ने से पहले।

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