Best Khamoshi Shayari

Best Khamoshi Shayari

1- हर खामोशी कुछ कहना चाहती है जिसे सुनने के लिए कान की नहीं दिल की ज़रुरत होती है।

2- हम खामोश रह गए उनकी बेवफाई देख कर भी उन्होंने भी खामोशी से मन ही मन सोच लिया हमने कुछ देखा ही नहीं।

3- उनकी बेरुखी पर हम कुछ कहना तो चाहते थे पर कह नहीं पाए, उनकी बेवफाई का दर्द हम सहना तो चाहते थे पर सह नहीं पाए।

4- ये ज़ालिम दुनिया की बातें मैंने कुछ देर खामोश हो कर क्या सुन ली उन्होंने मुझे गूंगा ही समझ लिया।

5- चाहने वाले शिकायतें करे तो परेशान मत होना परेशानी की बात तो तब होगी जब दोनों के बीच बस खामोशी होगी पर कोई बात नहीं होगी।

6- मेरे दोस्तों मुझे खामोश ही रहने दो कहीं मैं कुछ कहने पर आ गया तो तुम कुछ कहने लायक नहीं रहोगे।

7- गुज़र रहा हूँ तेरी चाहत में मैं उस दौर से, कहीं बहरा ना हो जाऊँ मैं तेरी खामोशी के शौर से।

8- जब भी गम आता है ये लब तो चुप रह लेते हैं पर कम्बख्त निगाहें आंसुओं से सब बयां कर देती है।

9- बिना शिकायत के मैं उनके सितम सेहता गया, मैं खामोश रह कर सब कुछ सहता रहा, ज़माना जो कुछ भी मुझ से कहता रहा।

10- खामोश था मैं सब ने लाचार समझ लिया, हमने दो जवाब क्या नहीं दिए पलट कर ज़माने ने हमे बेकार समझ लिया।

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11- वहां खामोश रहना ही बहतर है जहाँ तुम्हारे कहने से कोई फ़र्क़ ना पड़ता हो।

12- तेरी ये खामोशी अब कानों में गूंजती रहती है, तू आखिर चाहता क्या है ये बस मुझसे यही पूछती रहती है।

13- कहने वाले काफी थे मेरे पास पर मुझे सुनने वाला मेरे पास कोई भी नहीं था।

14-दोस्त की ख़ामोशी को मैं समझ नहीं पाया, चेहरे पर मुस्कान रखी और अकेले में आंसू बहाया।

15- कभी ख़ामोश बैठोगे, कभी कुछ गुनगुनाओगे, हम उतना याद आयेंगे, जितना तुम मुझे भुलाओगे।

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16- पता नहीं होश में हूँ या बेहोश हूँ, पर काफी सोच-समझ कर ही खामोश हूँ।

17- उनके पास झूठ कहने का हुनर ऐसा था की हम उसे ही सच समझ कर खामोश रहते थे।

18- दास्ताँ सुनाऊंगा तो मज़ाक बन जाऊंगा यही सोच कर खामोशी से मुस्कुराता रहता हूँ।

19- लफ़्ज़ों का काम है झूठ कहना खामोशी हमेशा सच बयां करती है।

20- न ज़ुबां बन पाए होंठों के ख़ामोश लफ़्ज़,आलम में तन्हाई के ख़्वाहिशें रोती रहीं।

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21- एक वो दौर था जब हम तुमसे कुछ कहना चाहते थे और एक ये दौर है की हम कुछ कहना ही नहीं चाहते।

22- मेरा मिज़ाज समुन्दर सा है बहार भले मैं काफी शोर करता हूँ पर दिल की गहराईयों में काफी खामोश हूँ मैं।

23- वो तो ज़िम्मेदारियों ने मुझे खामोश कर रखा है वरना ख़्वाब तो मेरे आज भी उड़ना चाहते हैं।।

24- कुछ कह दूंगा तो तकलीफ होगी उसे ये सोच कर मैं अक्सर खामोश हो जाता हूँ।

25- सब बस दिखावा करते है मेरी बातों को समझने का, कोई नहीं मिलता जो कोशिश करे मेरे जज़्बातों को समझने का।

26- जुबां अक्सर खामोश रह जाती है पर ये अश्क़ मेरे हालत बयां कर देते हैं।

27- खामोश रहना मजबूरी थी मेरा किरदार नहीं था, उनसे कुछ कहने का फायदा नहीं था पर इसका मतलब ये नहीं की हमे उनसे प्यार नहीं था।

28- अक्सर बेक़सूर कुछ कह नहीं पाता और दोषी भौख कर खुद को सही साबित कर लेता है।

29- मेरी ख़ामोशी में सन्नाटा भी हैं और शोर भी हैं, तूने गौर से नहीं देखा इन आखों में कुछ और भी हैं।

30- उसकी बेरुखी पर मैं खामोश रहा, मेरे दिल टूटने में मेरा यही दोष रहा।

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31- दिल को बड़ा भरोसा था उसकी मोहोब्बत पर एक बार टूटा क्या बस खामोश हो गया।

32- लफ़्ज़ों का जवाब हर कोई दे देता है खामोशी का हाल किसी के पास नहीं होता।

33- अक्सर इंसान तब खामोश हो जाता है जब उसके पास कोई सुनने वाला नहीं होता।

34- घात का एक खामोश पत्थर हूँ मैं मैंने नदी के हज़ार नखरे देखें है।

35- चीखें बेवजह हो सकती है पर खामोशी के पीछे हमेशा कोई वजह होती है।

36- खामोशी के पास कहने को बहुत कुछ होता है बस सुनाने वाला नहीं सुनने वाला होना चाहिए।

37- मेरी आवाज़ को इतना दबाया गया है की अब ये बस खामोशी से बैठ चुकी है।

38- जिस दिन मुझे मेरी वफ़ा पर नाज़ हो गया ऐसा लगता है उसी दिन से खुदा मुझ से नाराज़ हो गया।

39- दिल की वजह से कभी दिमाग से बगावत मत करना, मेरा कहा चुपचाप मान लो तुम कभी चाहत में मत पड़ना।

40- चुप रहना मेरा किरदार नहीं है बस मैं कुछ कहता नहीं क्यूंकि मेरी तो खुदा भी नहीं सुनता।

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41- खामोशी से जब मैंने खुद को सुन लिया मैंने ज़माने के तानों को अनसुना कर दिया है।

42- सच खामोश रहता है मगर गूंगा नहीं होता, और जिस दिन सच चीखता है सारे झूठों को बहरा कर देता है।

43- सच गूंगा नहीं है साहब यहाँ सुनने वाले ही जान बूझ कर बेहरे बनते हैं।

44- कोई भी खामोशी खामखा नहीं होती इसके पीछे की वजह या तो दिल टूटना होती है या फिर भरोसा टूटना।

45- इश्क़ का तो काम ही है खामखा बोलना परेशानी की बात तो तब होती है जब बात ही नहीं होती।

46- अब कहता नहीं कुछ मैं खुदा से जानता हूँ क्यूंकि वो मेरी सुनता नहीं है।

47- चुप रहना मेरी जुबां का भी कायदा नहीं है पर कुछ कहता नहीं तुमसे क्यूंकि जानता हूँ कोई फायदा नहीं है।

48- अब खामोश हो चुकी है गम की वजह से ज़िन्दगी कभी यहाँ भी खुशियों की चहल-पहल हुआ करती थी।

49- जब बेहोशी थी तो बोलता काफी था जब से होश आ गया है खामोश हो गया हूँ।

50- आखिर क्या वजह थी की ज़िन्दगी बेवफा हो गई, इसी खामोशी में ये ज़िन्दगी रफा-दफा हो गई।

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manish mandola

Manish mandola is a co-founder of bookmark status. He is passionate about writing quotes and poems. Manish is also a verified digital marketer (DSIM) by profession. He has expertise in SEO, GOOGLE ADS and Content marketing.

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