29+ jhoote ILzaam Shayari – (इल्जाम वाली शायरी)

29+ jhoote ILzaam Shayari – (इल्जाम वाली शायरी)
Ilzaam Shayari
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1- मौका छोड़ते नहीं ये कुछ अपने एहसान जताने पर, सजा नहीं इसलिए सोचते नहीं ये तोहमतें लगाने पर।

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2- खुदा तूने भी क्या खूब मुकम्मल ये दुनिया करी है, बेगुनाह सजा काट रहे हैं और गुनेहगार बा-इज़्ज़त बरी है।

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3- गुनाह किसका और गुनेहगार कौन, सभी दुश्मन दिखते हैं सच्चा यार कौन।

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4- हँसते-हँसते हूँ हवाले तेरे बता सजा क्या है, जानता हूँ मोहोब्बत गुनाह है नहीं पूछूंगा वजह क्या है।

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5- जख्म दर्द इलज़ाम अगर और देने हो तो बता देना, गए तुम हो हम यहीं है।

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6- बेवफा के नाम से मैं मशहूर हो गया, क्या मोहोब्बत उसकी सच्ची थी किसी ने सवाल किया ही नहीं।

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7- इलज़ाम हज़ारों है हर शख्स के सर पर, पैरों में छाले किसके कितने है कोई नहीं जानता।

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8- लंगड़े कहते हैं मुझे उसूलों पर चलना नहीं आता, गूंगों को शिकायत है मैं कहता गलत हूँ।

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9- बेवजह दीवार पर इलज़ाम है बंटवारे का, कई लोग एक कमरे में भी अलग रहते हैं।

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10- ये अदालत-ऐ-मोहोब्बत है जनाब यहाँ वही गुनहगार होता है जिसे सच्चा प्यार होता है।

11- सभी को गलत खुद को सही ठहरा कर, क्या कर लोगे ये पा कर।।

12- ज़हर देने वाले कई है कम है दवाई देने वाले, मैं खुद को गलत क्यों ना ठहराऊं कोई है ही नहीं मेरे हक़ में गवाही देने वाले।

13- दुनिया को मेरी हकीकत का पता कुछ भी नहीं, इल्जाम हजारो हैं पर खता कुछ भी नहीं।

14- बेवफा तू थी जो कर गई ये हाल मेरा, ज़माना कहता है मैं शराब की वजह से बर्बाद हुआ हूँ।

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15- हर टूटे दिल की जुबां से सुना है, इश्क़ गुनाह है।

16- जुबां गन्दी होने का इलज़ाम है मुझ पर खता सिर्फ इतनी है की हम सफाई नहीं देते।

17- सब जानने का मुझे दावा करते है वखिफ कोई ना हुआ, इलज़ाम कई है सर पर, पर अब तक साबित कोई ना हुआ।

18- इलज़ाम कई हो सकते है मुझ पर, पर कसम खुदा की कसूर मेरा कुछ भी नहीं।

19- बुरे नहीं थे बस हम पर बुरे होने का नाम लग था, अब बन गए हैं वैसे ही जैसा हम पर इलज़ाम लगा था।

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20- तुम्हारे बारे में कुछ गलत सुन नहीं सकता बस यही वजह है की खुद पर तोहमतें लगते देख लेता हूँ मैं।

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21- मुझे बुरा बता कर मुझ पर इलज़ाम लगा कर, खुश तो हो ना तुम खुद बेवफा थी ये बात दबा कर।

22- चिंगारी जो निकले तो लोगों को आग का सेहलाब नज़र आता है, आँखे खराब है ज़माने की हर किरदार पर दाग नज़र आता है।

23- नाम कम है हम बदनाम ज्यादा है, गुनाह कम हमारे हम पर इलज़ाम ज्यादा है।

24- दूसरों पर कीचड़ तो ऐसे उछालते हो जैसे खुद दूध के धुले हुए हो।

25- रिश्ते की लकड़ी हमारी खोखली थी इलज़ाम दिमाग को दे रहे हैं, बेवफाई का गुनाह तुमने किया इलज़ाम क़िस्मत को दे रहे हैं।

26- उँगलियाँ उठाते है जो मेरे किरदार पर कभी खुद से भी पूछे कितना उसूलों पर चले हैं।

27- हालातों की ही गलती होगी वो इंसान बुरे नहीं, उन्होंने लगाएं है तो अच्छे ही होंगे शायद हम बुरे है ये इलज़ाम बुरे नहीं।

28- हमारी ही गलती है जो हमने ये करार करा हुआ था, हमने वो वफ़ा का जाम माँगा था खुदा से जिसमे सिर्फ इलज़ाम भरा हुआ था।

29- कम्बख्त हुई करामात सब हाथों का काम था, पर गलती वक़्त की बता कर हालातों पर इलज़ाम था।

30- कुछ नहीं तो सड़कों पर चुगलिया सरे-आम लगा लेते हैं, हम ज़माने वाले है हमे सब माफ़ है आओ सब पर इलज़ाम लगा देते हैं।

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