I Hate My Life Shayari In Hindi

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उस मोड़ से शुरू करें चलो फिर से जिंदगी हर शय हो जहाँ नई सी और हम हो अज़नबी।

हाथ पकड़ कर रोक लेते अगर, तुझपर ज़रा भी ज़ोर होता मेरा, ना रोते हम यूँ तेरे लिये, अगर हमारी जिन्दगी में, तेरे सिवा कोई ओर होता।

मेरी जिंदगी मै, खुशियां तेरे बहाने से है, आधी तुझे सताने से है, आधी तुझे मनाने से है।

बेगुनाह कोई नहीं सबके राज होते हैं, किसी के छुप जाते हैं, किसी के छप जाते है।

एक हाथ जिन्दगी, दूसरे हाथ मौत थी और, मैंने ” तुम्हें ” चुन लिया।

कितनी झूठी होती है मोहब्बत की कसम, देखो तुम भी ज़िंदा हो , मैं भी ज़िंदा हूँ।

जिंदगी के उस मौकाम पे आके पहुंच गया हूँ, जाहां हरएक अपना पराया लगता है, अच्छाई की तलाश करके थक चुका हूँ, अब जेहेनुम से भी बुरा ये दुनिया लगता है।

ये संग दिलो की दुनिया है, यहाँ संभल के चलना दोस्त, यहाँ पलकों पर बिठाया जाता है, नजरो से गिराने के लिए।

जिन्दगी के हाथ नहीं होते, लेकिन कभी कभी वो, ऐसा थप्पड़ मारती है, जो पूरी उम्र याद रहता है।

अधूरी कहानी पर खामोश, होठों का पहरा है, चोट रूह की है इसलिए, दर्द जरा गहरा है।

वो तो अपनी एक आदत भी ना बदल सका, पता नहीं क्यों मैंने उसके लिए, अपनी ज़िन्दगी बदल डाली।

उड़ रही है पल पल जिंदगी रेत सी, और हमें लग रहा था, कि हम बड़े हो रहे है।

मेरी जेब में ज़रा सा छेद क्या हो गया, सिक्के से ज़्यादा तो रिश्ते गिर गए।

दर्द ही सही मेरे इश्क का इनाम तो आया, खाली ही सही हाथों में जाम तो आया, मैं हूँ बेवफ़ा सबको बताया उसने, यूँ ही सही, उसके लबों पे मेरा नाम तो आया।

आग दिल में लगी जब वो खफ़ा हुए, महसूस हुआ तब, जब वो जुदा हुए, करके वफ़ा कुछ दे ना सके वो, पर बहुत कुछ दे गए जब वो बेवफ़ा हुए।

प्यार किया तुझसे एक खता हो गयी मुझसे अब सिर्फ जी रहे हैं नफरत से।

जीते थे कभी हम भी शान से महक उठी थी फिजा किसी के नाम से पर गुज़रे हैं हम कुछ ऐसे मुकाम से की नफरत सी हो गयी है मोहब्बत के नाम से।

कोई अच्छी सी सज़ा दो मुझको, चलो ऐसा करो भूला दो मुझको, तुमसे बिछडु तो मौत आ जाये, दिल की गहराई से ऐसी दुआ दो मुझको

प्यार किया बदनाम हो गए, चर्चे हमारे सरेआम हो गए, ज़ालिम ने दिल उस वक़्त तोडा, जब हम उसके गुलाम हो गए।

जिस जिस ने मुहब्बत में, अपने महबूब को खुदा कर दिया, खुदा ने अपने वजूद को बचाने के लिए, उनको जुदा कर दिया।

आप को खोने का हर पल डर लगा रहता है; जब कि आपको पाया ही नहीं; तुम बिन इतना तन्हा हूँ मैं; कि मेरे साथ मेरा साया भी नहीं।

उड़ रहा था मेरा दिल भी परिंदों की तरह, तीर जब लग गई तो कोई भी मरहम न हुआ, देख लेना था मुझे भी हर सितम की अदा, ऐ सनम तेरे जैसा मेरा कोई दुश्मन न हुआ।

रास्ता ऐसा भी दुशवार न था, बस उसको हमारी चाहत पे ऐतबार न था, वो चल न सकी हमारे साथ वरना, हमे तो जान देने से भी इनकार न था।

बता मुझे ये तेरी तनहाई कैसी है; समझकर प्यार सारा फिर भी रुसवाई कैसी है; हमें और भी मजबूर कर दिया है तूने; तू बता तो सही ये तेरी तनहाई कैसी है।

मुझे किसी ने पूछा, दर्द की कीमत क्या है ? मैंने कहा मुझे नहीं पता, लोग तो मुझे मुफ्त में दे जाते है।

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