Garib shayari

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जिस इंसान को गरीबी नसीब हुई होती हैं उस इंसान का दबाने में लोगो को ज्यादा कठिनाई नहीं होती है।

जिस शक्श के पास धन दौलत हैं लेकिन उसके साथ उसका परिवार नहीं, सच में उससे बड़ा गरीब इस दुनिया में कोई और नहीं।

अपनी इस गरीबी को भगवान का दिया श्राप नहीं बल्कि उनका वरदान मानो, क्योंकि बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करना का जिगरा गरीब शक्श में ही होता है।

जो भी व्यक्ति इस दुनिया में गरीब पैदा हुआ है, उस व्यक्ति का हर शक्श ने जरूर फ़ायदा उठाया है।

यह जमाना हमेशा किसी भी व्यक्ति के गरीब होने का पता उसके कपड़ो को देखकर लगाता है उसका दिल या उसके विचारो को देखकर नहीं।

खुदा का भी उस वक्त अच्छा लगता होगा, जब कोई शक्श किसी गरीब की मदद करता होगा।

बहुत जल्दी सीख लेते हैं, ज़िन्दगी के सबक, गरीब के बच्चे बात बात पर जिद नहीं करते।

अगर अपनी जिंदगी में तुम जरुरत से ज्यादा पैसा कमाने लग जाओ, तो किसी गरीब की जरुरत को पूरी करने में पीछे मत हटना।

किसी गरीब को दान देना उसके बदले वो तुम्हे दुआ देगा, वो दुआ कितनी बड़ी होगी वो तुम्हे आने वाला कल खुद बता देगा।

तानो का भार लोगो की डाट उसे सब सहना पड़ता है, क्या करे जनाब वो गरीब जो ठहरा है।

गरीब नहीं जनता की क्या हैं मंदिर और क्या हैं मस्जिद बस जहा उसे खाना मिलता दिखता हैं वही उसके लिए जाना हो जाता हैं निश्चित।

सुला दिया माँ ने भूखे बच्चे को ये कहकर, परियां आएंगी सपनों में रोटियां लेकर।

बहुत जल्दी सीख लेता हूँ जिंदगी का सबक गरीब बच्चा हूँ बात-बात पर जिद नहीं करता।

वो रोज रोज नहीं जलता साहब मंदिर का दिया थोड़े ही है गरीब का चूल्हा है।

अमीरी का हिसाब तो दिल देख के कीजिये साहेब, वरना गरीबी तो कपड़ो से ही झलक जाती है।

खिलौना समझ कर खेलते जो रिश्तों से उनके निजी जज्बात ना पूछो तो अच्छा है बाढ़ के पानी में बह गए छप्पर जिनके कैसे गुजारी रात ना पूछो तो अच्छा है।

भटकती है हवस दिन-रात सोने की दुकानों पर गरीबी कान छिदवाती है तिनके डाल देती है।

तहजीब की मिसाल गरीबों के घर पे है दुपट्टा फटा हुआ है मगर उनके सर पे है।

किसी गरीब को मत सता, गरीब बेचारा क्या कर सकेगा, वोह तोह बस रो देगा, पर उसका रोना सुन लिया ऊपर वाले ने, तोह तू अपनी हस्ती खो देगा।

जब भी देखता हूँ किसी गरीब को हँसते हुए, यकीनन खुशिओं का ताल्लुक दौलत से नहीं होता।

अपने मेहमान को पलकों पे बिठा लेती है गरीबी जानती है घर में बिछौने कम हैं।

शाम को थक कर टूटे झोपड़े में सो जाता है वो मजदूर, जो शहर में ऊंची इमारतें बनाता है।

आज तक बस एक ही बात समझ नहीं आती, जो लोग गरीबों के हक के लिए लड़ते हैं वो कुछ वक़्त के बाद अमीर कैसे बन जाते हैं।

जरा सी आहट पर जाग जाता है वो रातो को, ऐ खुदा गरीब को बेटी दे तो दरवाज़ा भी दे।

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