11+ Best Short Moral Stories in Hindi for Class 1

11+ Best Short Moral Stories in Hindi for Class 1

बंदर के पूर्वज

एक बंदर और लोमड़ी में अच्छी दोस्ती थी। वे दोनों अपना अधिकतर समय एक-दूसरे के साथ बिताते थे। वे साथ-साथ खाना तलाशते, खेलते, घूमते और खूब सारी बातें करते। एक दिन वे दोनों घूमते-घूमते कब्रिस्तान जा पहुँचे।

बंदर वहाँ पर रुक गया तो लोमड़ी ने पूछा, “दोस्त! तुम रुक क्यों गए?” बंदर बोला, “दोस्त ! मुझे रोना आ रहा है। न जाने इन कब्रों के नीचे दफनाए गए कितने ही आदमियों ने मेरे पूर्वजों की सेवा की थी।” लोमड़ी ने तुरंत कहा, “अच्छा ! वैसे भी तुम मुझे इन कब्रों के बारे में कोई भी कहानी सुनाओगे तो मुझे मानना ही पड़ेगा।

अब बेचारे मरे हुए लोग तो उठकर सच्चाई नहीं बताने वाले हैं । हैं न!” यह सुनकर बंदर चुप रह गया।

शिक्षा: हाजिरजवाबी एक अच्छा गुण है।

लोमड़ी और लकड़हारा

एक बार एक लोमड़ी शिकारी से बचते-बचाते एक लकड़हारे के पास जा पहुँची। उसने लकड़हारे से विनती की, “कृपा करके मुझे शिकारी से बचा लो। मैं तुम्हारी एहसानमंद रहूंगी।”

लकड़हारे ने लोमड़ी से अपनी झोपड़ी में छिप जाने को कहा। कुछ देर बाद शिकारी वहाँ आया और उसने लकड़हारे से लोमड़ी के बारे में पूछा तो लकड़हारे ने मुँह से तो ‘न’ कह दिया, लेकिन उंगली से अपनी झोंपड़ी की तरफ इशारा कर दिया।

शिकारी की समझ में कुछ नहीं आया और वह वहाँ से चला गया। शिकारी के जाने के बाद लोमड़ी झोंपड़ी से बाहर आई और जाने लगी तो लकड़हारा बोला, “मैंने तुम्हारी जान बचाई। कम से कम शुक्रिया तो अदा करती जाओ।” अच्छा! तुम तो विश्वासघाती हो।

मैंने तुम्हें झोंपड़ी की तरफ इशारा करते हुए देख लिया था। तुम जैसे व्यक्ति को धन्यवाद क्यों कहूँ?” यह कहकर लोमड़ी वहाँ से चली गई।

शिक्षा : हमें कभी भी दूसरों का विश्वास नहीं तोड़ना चाहिए।

घोड़े की जीत

एक दिन एक घोड़े और एक हिरण में इस बात पर बहस शुरू हो गई कि दोनों में कौन अधिक तेज दौड़ सकता है। घोड़ा कह रहा था कि मैं सबसे तेज दौड़ सकता हूँ। दूसरी ओर हिरण भी अपनी जिद पर अड़ा हुआ था। उसका भी यही कहना था कि वह सबसे अधिक तेज दौड़ सकता है।

आखिरकार घोड़ा एक व्यक्ति के पास जाकर बोला, “क्या, आप मेरी मदद कीजिए, ताकि मैं हिरण को हरा सकूँ। ” वह आदमी बोला, “ठीक है ! मैं तुम्हारी मदद करने को तैयार हूँ लेकिन सबसे पहले मैं तुम्हारी पीठ पर काठी डाल कर बैठना चाहूंगा।”

घोड़ा इस बात के लिए राजी हो गया। आदमी तुरंत उसकी पीठ पर काठी डाल कर बैठ गया। फिर दोनों ने हिरण को हरा दिया। हिरण को हराने के बाद घोड़ा आदमी से बोला,”अब आप मेरी पीठ से उतर जाओ।” आदमी बोला, “मैं नहीं उतरूंगा क्योंकि अब तुम पर मेरा अधिकार हो गया है और तुम्हें अब वही करना पड़ेगा, जो मैं चाहूंगा।

शिक्षा : अनजान व्यक्ति पर विश्वास नहीं करना चाहिए।

शेर की गुफा में हिरण

एक दिन जंगल में एक हिरण खाने की तलाश में घूम रहा था। तभी वहाँ पर शिकार करने आए कुछ शिकारियों की नजर उस पर पड़ गई। शिकारियों से बचता हुआ वह इधर-उधर छिपने की जगह ढूँढने लगा।

भागते-भागते उसे एक बड़ी-सी गुफा दिखाई दी और वह बिना सोचे-समझे उसमें घुस गया। यह गुफा शेर की थी। उस समय शेर कहीं गया हुआ था।

बहरहाल, वहाँ आकर हिरण की जान में जान आई कि अब शिकारी उसे पकड़ नहीं पाएंगे। लेकिन वह बैठकर अभी चैन की साँस भी नहीं ले पाया था कि शेर गुफा में लौट आया। हिरण को अपनी गुफा में देखकर शेर की खुशी का ठिकाना न रहा।

उसने झपटकर हिरण को पकड़ लिया और उसका काम तमाम कर दिया। शेर ने हिरण को खाकर मजे से अपना पेट भरा। बेचारा हिरण परेशानी में पड़कर अच्छा-बुरा न समझ सका और अपनी जान गँवा बैठा।

शिक्षा: हमें मुसीबत के समय धैर्य नहीं छोड़ना चाहिए।

उपदेशक और आलोचक

एक दिन एक महात्मा किसी सभा में उपदेश दे रहे थे। उनके उपदेश सुनने के लिए लोगों की भारी भीड़ जमा थी। इस सभा में सभी लोग शांतिपूर्वक बैठकर उसे सुन रहे थे परंतु उनके बीच बैठा एक आदमी बार-बार बीच में उन्हें टोक रहा था।

पहले तो उन्होंने उसे शांत करने की कोशिश की लेकिन जब वह व्यर्थ के तर्क देने से बाज नहीं आया और उनका अपमान करने लगा तो उन्होंने उसे फटकारना जरूरी समझा। वह बोले, “तुम्हें इस तरह मेरी बात काटकर मेरा अपमान करने का कोई अधिकार नहीं है।

यदि तुम्हें मेरी बात नहीं सुननी तो यहाँ से चले जाओ। कम से कम बीच में विघ्न तो मत डालो। तुम्हारे बार-बार बीच में टोकने से मुझे ही नहीं बल्कि औरों को भी परेशानी हो रही है।

आखिर तुम यहाँ आए ही क्यों थे? जाओ, अब यहाँ से चले जाओ और कारण विघ्न पैदा न करो।” वह व्यक्ति चुपचाप वहाँ से उठकर चला गया।

शिक्षा: अज्ञात व्यक्ति को ज्ञान की बात नहीं सुनती।

बूढी औरत और कौआ

बहुत समय पहले की बात है एक गांव में एक पीपल का पेड़ था। जिसमे बहुत सारे कौए रहते थे। एक दिन सुबह के समय सभी कौए रोज़ की तरह खाने की तलाश में पेड़ से चले गए। लेकिन एक कौआ सोया रहा।

जब वह उठा तो उसने देखा की सभी कौए जा चुके थे। इसके बाद उसने अकेले ही भोजन की तलाश करने के लिए जाने की सोची।
वह पेड़ से उड़ कर पुरे गांव में खाने की तलाश करने लगा। लेकिन उसको कहीं भी भोजन नज़र नहीं आया। इसके बाद वह एक घर की छत पर बैठ गया। उसको वहाँ बहुत ही अच्छी खुश्बू आ रही थी।

उसने जिस दिशा से खुश्बू आ रही थी। उस ओर जाने लगा। उसने देखा की एक बूढी औरत घर के आँगन में बैठ कर वड़ा बना रही थी। वड़ा को देखकर कौए के मुँह में पानी आ गया। उसको बहुत भूख लगी थी।

वह वड़ा तभी खाना चाहता था। जब वह नीचे उस बूढी औरत के पास गया तो उसने देखा की बूढी औरत ने एक कौए को पहले से बांध रखा है। बूढी औरत ने उस कौए को भी यही कहाँ की अगर तुमने वड़ा चुराने की कोशिश की तो तुमको भी इसकी तरह बांध दूंगी।
कौए को समझ आ गयी की जब तक बूढी औरत वहाँ पर है तब तक वह वड़ा नहीं चुरा सकता। उसने एक तरक़ीब सोची वह उस घर के पीछे गया और बच्चों की आवाज़ में बोला दादी कहाँ हो।

इसके बाद बूढी औरत बोली आती हूँ। जैसे ही बूढी औरत वहाँ से गयी कौए ने आकर एक वड़ा चुरा लिया और अपने पेड़ पर चला गया। जब वह अपने मुँह में वड़ा दबाएँ अपने घोंसले में पहुंचा तभी एक चालाक लोमड़ी में कौए को देख लिया।

वड़े को देखकर लोमड़ी के मुँह में पानी आ गया। उसने कौए की तारीफ करनी शुरू कर दी। वह बोला कितना अच्छा काले रंग का कौआ है। इसके पंख कितने अच्छे है। इसकी आँखे कितने अच्छी है।

अपनी तारीफ़ सुनकर कौआ बहुत खुश हुआ और सब कुछ भूल गया। इसके बाद लोमड़ी ने कहा ऐसे अच्छे कौए की आवाज़ भी जरूर अच्छी होगी। उसने कौए से कहा क्या तुम मुझको एक गाना सुनाओगे।

इसके बाद कौए ने जैसे ही अपना मुँह खोला वड़ा पेड़ से नीचे गिर गया। चालाक लोमड़ी ने वड़ा उठाया और वहाँ से चला गया।

कौए को पता चल चूका था की लोमड़ी ने उसको बेवकूफ बनाया है। उसने सोचा बूढी औरत से वड़ा चुराने की अब दूसरी तरक़ीब लगानी पड़ेगी।

शिक्षा:- इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है की हमें झूठी तारीफ़ करने वालो से बचना चाहिए।

छोटू की सीख

किसी समय एक समुद्र में डॉल्फिन, व्हेल और कुछ छोटी मछलियाँ साथ-साथ रहती थीं। एक बार उनमें किसी बात पर मन-मुटाव हो गया। डॉल्फिन और व्हेल में भयंकर लड़ाई होने लगी।

समुद्र के छोटे जीव-जंतु इस अशांत माहौल से काफी डर गए थे। एक नन्ही मछली ने सोचा कि वह दोनों मछलियों को समझाने का प्रयास करेगी कि इस तरह लड़ाई-झगड़े का क्या फायदा; दोनों मिल-जुलकर रहो। एक दिन डॉल्फिन और व्हेल मछली लड़ने के लिए आमने-सामने खड़ी थीं कि वह नन्ही मछली वहाँ पहुँच गई।

वह दोनों को संबोधित करके बोली, “बहनो! मुझे बताओ कि तुम दोनों क्यों लड़ रही हो? मैं तुम्हारा झगड़ा सुलझाती हूँ।” यह सुनकर दोनों बड़ी मछलियाँ उसका मजाक उड़ाते हुए बोली, “तुम्हारे जैसी छोटी मछली से सलाह लेने से तो अच्छा है कि हम दोनों मछलियाँ लड़ते-लड़ते ही मर जाएँ।” शिक्षा: किसी के झगड़े में नहीं पड़ना चाहिए।

शिक्षा: किसी के झगड़े में नहीं पड़ना चाहिए।

इस कहानी को भी पढ़े:-

डरपोक शिकारी

एक दिन जंगल में एक लकड़हारा लकड़ियाँ काट रहा था कि तभी वहाँ पर एक शिकारी हाँफता हुआ आया। उसने लकड़हारे से पूछा, “महाशय! क्या आपने शेर के पैरों के निशान देखे हैं? क्या आप मुझे शेर की गुफा दिखा सकते हैं?” लकड़हारे ने सोचा, लगता है कि यह शिकारी काफी बहादुर है, इसीलिए शेर का पीछा कर रहा है।

मुझे इसकी मदद अवश्य करनी चाहिए।” यह सोचकर वह शिकारी से बोला, “मेरे साथ चलिए। मैं आपको शेर की गुफा तक ले चलता हूँ।” यह सुनते ही शिकारी डर के मारे काँपने लगा। फिर थोड़ा साहस करके बोला, “बस ठीक है। मुझे सिर्फ शेर के पैरों के निशान देखने थे।

उसकी गुफा में जाकर मैं क्या करूंगा?’ उसकी बात सुनकर लकड़हारा सोचने लगा कि यह शिकारी उन लोगों में से है जो बातें तो बड़ी-बड़ी करते हैं पर काम कुछ नहीं करते।

शिक्षा: व्यक्ति को बातें ही नहीं, बल्कि काम भी बड़े करने चाहिए।

झूठा आदमी

एक बार एक व्यक्ति बहुत बीमार पड़ गया। उसके बचने की कोई आशा नहीं थी। लेकिन मरते-मरते भी उस आदमी ने भगवान से प्रार्थना की, “हे भगवान! यदि आप मुझे थोड़ी उम्र और दे दें तो मैं आपको सौ बैलों की बलि चढ़ाऊंगा।

भगवान ने उसकी प्रार्थना सुन ली और उसे स्वस्थ कर दिया। परंतु स्वस्थ होने पर उस आदमी की नीयत बदल गई और उसने सौ बैलों की मिट्टी की मूर्तियाँ बनाईं और उन्हें हवनकुंड में डाल कर बोला, “है भगवान! मैं तुम्हें अपनी शपथ के अनुसार सौ बैलों की बलि दे रहा हूं।

कृपया इसे स्वीकार करें।%” उस व्यक्ति की बेईमानी पर भगवान बहुत क्रोधित हुए और उन्होंने उसे स्वप्न में आकर कहा,”बेटा! समुद्र तट पर कल तुम्हें सोने की सौ मोहरें मिलेंगी।”

वह व्यक्ति लालची तो था ही, इसलिए रात में ही समुद्र की ओर चल पड़ा। वहाँ पहुँचने पर समुद्री डाकुओं ने उस पर जमकर कोड़े बरसाए और दास बनाकर अपने साथ ले गए।

शिक्षा: झूठ बोलना पाप है।

किसान और उसके आलसी बेटे

एक गाँव में एक किसान रहता था। उसके दो बेटे थे और दोनों पहले दर्जे के आलसी थे। किसान दिन भर खेतों में मेहनत करता और दोनों बेटों का भरण पोषण करता। एक दिन किसान बीमार पड़ गया।

हर तरह के इलाज के बाद भी उसकी बीमारी ठीक होने का नाम नहीं ले रही थी। वह समझ गया था कि अब वह ज्यादा दिन तक जीवित नहीं रहेगा। उसे अपने दोनों बेटों की चिंता थी कि उसके मरने के बाद उनका क्या होगा।

एक दिन लेटे-लेटे उसे एक तरकीब सूझी। उसने दोनों बेटों को बुलाकर कहा, “मैंने अंगूरों के बाग में बहुत नीचे तुम्हारे लिए खजाना दबाया हुआ है, मेरे मरने के बाद उसे खोदकर निकाल लेना।” किसान के मरने के बाद किसान के बेटे अंगूरों के बाग में गए।

उन्होंने मिलकर पूरा खेत खोद डाला पर कुछ हाथ न लगा। वे अपने पिता को कोसने लगे। कुछ दिनों बाद बरसात हुई और उनकी अंगूरों की बेलें लहलहाने लगी। बेलें अंगूरों से लद गई थीं।

अंगूर पकने पर उन्होंने उन्हें महंगे भाव से बेचा और अमीर बन गए। अब उन्हें समझ आया कि उनके पिता ने इसी खजाने के बारे में कहा था।

शिक्षा: परिश्रम से ही सफलता मिलती है।

हिरण का बच्चा

एक जंगल में हिरण का परिवार रहता था। उस हिरण एक प्यारा सा सुंदर सा बच्चा था। एक दिन खरगोश से दौड़ हुई , हिरण का बच्चा खरगोश से आगे भागने लगा। वह जंगल पार कर गया , खेत पार कर गया , नदी भी पार कर गया , पर पहाड़ पार नहीं कर पाया।

चट्टान से टकराकर गिर गया और जोर – जोर से रोने लगा, बंदर ने उसकी टांग सहलाई पर चुप नहीं हुआ। भालू दादा ने गोद में उठा कर खिलाया उससे भी चुप नहीं हुआ। सियार ने नाच किया उससे भी चुप नहीं हुआ , फिर हिरण की मां आई उसने उसे प्यार किया और कहा चलो उस पत्थर की पिटाई करते हैं। हिरण का बच्चा बोला नहीं ! वह भी रोने लगेगा।

मां हंसने लगी बेटा हंसने लगा , बंदर हंसने लगा , भालू हंसने लगा सब हंसने लगे।

शिक्षा – बालकों में संवेदना बड़ों से अधिक होती है, उसे बढ़ावा दे।

पतंग से उड़ना सीखो

पंद्रह अगस्त का समय था आकाश में ढेर सारे पतंग उड़ रहे थे। एक पतंग उड़ कर नीचे की ओर आ रहा था। चिड़िया पेड़ पर अपने घोंसले में बैठी थी , अपने बच्चों को उड़ना सिखा रही थी। चिड़िया के बच्चे उड़ने से डर रहे थे। एक बच्चा बोला पतंग आ रही है मां।

चिड़िया मां ने कहा डरो मत उसकी डोर को कसकर मुंह से पकड़ लेना। सभी बच्चों ने डोर को मुंह से पकड़ लिया। सबको खूब मजा आया। उड़ते-उड़ते मुंह से पतंग की डोर छूट गई। सभी बच्चे अपने पंख फड़फड़ा कर उड़ने लगे। उन्हें खूब मजा आया , अब उन्होंने उड़ना सीख लिया था।

शिक्षा – डरने से काम का नुक्सान होता है।

nitish sundriyal

Nitish sundriyal is a co-founder of bookmark status. He is passionate about writing quotes and Stories. Nitish is also a verified digital marketer (DSIM) by profession. He has expertise in SEO, Social Media Marketing, and Content marketing.

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